Hindi Questions For DSSSB Exam : 3rd March 2018

Hindi Questions For CTET 2017 Exam

हिंदी भाषा CTET परीक्षा का एक महत्वपूर्ण भाग है इस भाग को लेकर परेशान होने की जरुरत नहीं है .बस आपको जरुरत है तो बस एकाग्रता की. ये खंड न सिर्फ CTET Exam (परीक्षा) में एहम भूमिका निभाता है अपितु दूसरी परीक्षाओं जैसे UPTET, KVS,NVS DSSSB आदि में भी रहता है, तो इस खंड में आपकी पकड़, आपकी सफलता में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है.CTET ADDA आपके इस चुनौतीपूर्ण सफ़र में हर कदम पर आपके साथ है.

निर्देश(1-5): नीचे दिए गए गद्यांश के आधार पर पांच प्रश्न दिए गए है. गद्यांश का अध्ययन कीजिये और प्रश्न का उत्तर दीजिये.

प्रकृति पर आदमी के नियंत्रण में जो वृद्धि होती है उसका परिणाम या तो भला होता है या बुरा. हाल में जो वैज्ञानिक प्रगति हुई है उससे आर्थिक सम्पन्नता मिली है और साथ ही आणविक शक्ति भी. आज अगली पीढ़ी में सारी दुनिया की भौतिक समृद्धि के बढ़ने की संभावना इतनी बढ़ गई है जितनी अभी तक कल्पना भी नहीं की गई थी. इसका कारण है अविष्कार और नयी-नयी खोजें. अगर हम समझदार हैं तो दुनिया से गरीबी और भूख को निकाल बाहर कर सकते हैं; यहाँ तक कि महाविनाश तक आ सकता है. इस अणु युग में जीवित रहने के लिए सहिष्णुता, धैर्य, दया और साहस का विकास करने की आवश्यकता है.

Q1. वैज्ञानिक प्रगति ने हमें प्रदान की है
(a) वैभव सम्पन्नता
(b) सम्पन्नता एवं अणुशक्ति
(c) गरीबी और भूख
(d) प्रगति और प्रतिष्ठा

Q2. भावी पीढ़ी में सम्भावनाएँ बढ़ी हैं
(a) विश्वशान्ति की
(b) स्वास्थ्य और स्वच्छता की
(c) भौतिक सम्पन्नता की
(d) विवेक और समझदारी की

Q3. दुनिया से भूख और गरीबी मिटाने का एकमात्र उपाय है
(a) वैज्ञानिक आविष्कारों में वृद्धि
(b) युवकों का परिश्रमी होना
(c) वैज्ञानिक अविष्कारों का विवेकपूर्ण उपयोग
(d) धैर्य और साहस से काम लेना

Q4. अणु युग में महाविनाश को बचाने के लिए अत्यन्त आवश्यक है
(a) युद्ध-विराम
(b) सहनशीलता, धैर्य, साहस आदि का विकास
(c) अणुशक्ति का संग्रह करना
(d) संगठन और एकता

Q5. इस अनुच्छेद का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक हो सकता है
(a) अणु युग
(b) मानवीय मूल्यों का संरक्षण
(c) अणु युग और प्रगति की दिशाएँ
(d) इनमें से कोई नहीं

निर्देश(6-10) :नीचे दिए गए गद्यांश के आधार पर पांच प्रश्न दिए गए है. गद्यांश का अध्ययन कीजिये और प्रश्न का उत्तर दीजिये.

प्रत्येक युग के महान विचारकों ने धन-संग्रह की प्रवृत्ति की निदा की है. धन को इसलिए हेय दृष्टि से देखा जाता है कि गर्व, आलस्य तथा अन्य अवगुण इसका अनुसरण करते हैं. निस्सन्देह हम सामान्यतः यह देखते हैं कि मनुष्य जितना ही धनी होता है उतना ही पुण्य अथवा श्रेष्ठ कार्यों से दूर रहता है. किन्तु सूक्ष्म निरीक्षण करने पर हम पाएंगे कि धन स्वयं में दोषपूर्ण नहीं है. वस्तुतः धन के अनुचित प्रयोग की ही निदा की जानी चाहिए। हमारा कर्त्तव्य है कि हम जन-कल्याण के लिए सम्पत्ति-दान करके समाज के प्रति सत्यनिष्ठ रहे. यदि हम अपने देश के पूर्ण विकास के इच्छुक हैं तो केवल निजी लाभों को दृष्टि में नहीं रखा जाना चाहिए.

Q6. धन-संग्रह की प्रवृत्ति निन्दनीय है क्योंकि अधिक धन
(a) मनुष्य को लोभी बनाता है
(b) अभिमान, आलस्य और अन्य अवगुणों को जन्म देता है
(c) अपने कर्त्तव्य से दूर करता है
(d) जीवन को कष्टमय बनाता है

Q7. धन-संचय दोष न होकर दोष है धन का
(a) दुरूपयोग
(b) अत्यधिक लाभ
(c) व्यक्तिगत कार्यों के लिए उपयोग
(d) तिरस्कार

Q8. धन का उचित उपयोग करने के लिए हमें चाहिए 
(a) निजी लाभ की ओर ध्यान देना
(b) अर्जित सम्पत्ति दान में दे देना
(c) समाज-हित को सर्वोपरि समझना
(d) जनकल्याण के लिए सम्पत्ति-दान के साथ समाज के प्रति निष्ठावान् होना

Q9. श्रेष्ठ कार्यों से व्यक्ति दूर होने लगता है, जब वह
(a) अकिंचन हो जाता है
(b) पाप कर्मों की ओर प्रवृत्त हो जाता है
(c) अधिक धनी होता जाता है
(d) वास्तविक लक्ष्य को विस्मृत कर बैठता है.

Q10. इस अवतरण का सर्वाधिक उपयुक्त शीर्षक हो सकता है
(a) धन-संग्रह
(b) जीवन के लिए धन
(c) धन का समुचित उपयोग
(d) धन ही जीवन है